ताना बाना
मन की उधेड़बुन से उभरे विचारों को जब शब्द मिले
तो कुछ सिलवटें खुल गईं और कविता में ढल गईं
और जब शब्दों से भी मन भटका
तो रेखाएं उभरीं और
रेखांकन में ढल गईं...
इन्हीं दोनों की जुगलबन्दी से बना है ये
ताना- बाना
यहां मैं और मेरा समय
साथ-साथ बहते हैं
गुरुवार, 9 अप्रैल 2020
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होली
🩷💚💛💙🧡💜❤️🩵 प्रेम करुणा सद्भाव का ऐसा रंग बनाएं सब रंगें जिसमें न कोई भेदभाव रह पाए न कोई भेदभाव रह पाए, भीगें प्रेमरस में बम गोलियों ...

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