🩷💚💛💙🧡💜❤️🩵
प्रेम करुणा सद्भाव का ऐसा रंग बनाएं
सब रंगें जिसमें न कोई भेदभाव रह पाए
न कोई भेदभाव रह पाए, भीगें प्रेमरस में
बम गोलियों को झोंके होलिका दहन में
तेरे मेरे की न होवे अंधाधुंध होड़ बावली
हम सब पहले खेलें रंग फिर मिल खाएं
गुझिया केक सिवईं और दार नी पोरी
आओ हम सब मिल इक ऐसा जग बनाएं
बच्चे हों बेख़ौफ़ नित नए इन्द्रधनुष रचाएँ
हाथों में हों हाथ आँखों में विश्वास जगे,
सूखे मन में फिर से आशा का पलाश जगे।
मन के आँगन में मानवता के दीप जलाएँ
मन का आकाश धुले द्वेष की धुँध छँट जाए
प्रेम करुणा सद्भाव का ऐसा रंग बनाएं
सब रंगें जिसमें न कोई भेदभाव रह पाए
न कोई भेदभाव रह पाए, भीगें प्रेमरस में
"सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे सन्तु निरामया:”
तन- मन भीगे प्रेम में हम मगन हो गाएँ !!
—उषा किरण
फोटो; AI की मेहरबानी 😊

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें