तुम देना मुझे एक कोरा फलक
मैं धनक के रंगों में उंगली डुबो कर
बना दूँगी सब्र और सुकूँ से रौशन
एक नई कायनात
एक ऐसा जहाँ, जहाँ वे सब होंगे
जिनका सुकून, छत और जमीन
छीनी जा चुकी है वहशियाना हवस
और लालच के हाथों
मैं अपनी तूलिका से बना दूँगी वहाँ
महकते फूल सितारे दमकता चाँद
और खूब सारे हंसते खिलखिलाते
चेहरे मासूम बच्चों के…!!
—उषा किरण
